Devkinandan Thakur Biography in hindi | देवकीनंदन ठाकुर जीवन परिचय

देवकीनंदन ठाकुर

देवकीनंदन ठाकुर

वास्तविक जीवन

देवकीनंदन ठाकुर एक कथाकार और आध्यात्मिक गुरु हैं। उनके द्वारा दिए गए, उपदेश मानव हृदय की आत्मा को पवित्र करते हैं। हजारों लोग उनके भजनों से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। वह एक महान कथावाचक भी हैं। वह भगवत गीता के प्रबल वक्त हैं। देवकीनंदन ठाकुर पूरी दुनिया में संगीत और उपदेशों के वर्णन के लिए प्रसिद्ध हैं।

देवकीनंदन ठाकुर
देवकीनंदन ठाकुर

देवकीनंदन ठाकुर का जन्म 12 नवंबर 1978 को उत्तर प्रदेश के मथुरा, ओहावा गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही, उनकी आध्यात्मिकता में रूचि रही है। 6 साल की उम्र में, उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और वृंदावन आ गए। जहां, उन्होंने शास्त्रों, वेदों और भगवत गीता का अध्ययन किया। वह वृंदावन में आयोजित नाटकों में भाग लेते थे। वृंदावन में उनकी मुलाकात अपने आध्यात्मिक गुरु पुरुषोत्तम शरण शास्त्री से हुई।

परिवार

उनके पिता का नाम राजवीर शर्मा और उनकी मां दोनों धार्मिक थे। उनका विवाह अंदमाता से हुआ, जिससे उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई है। जिसका नाम देवांश है।

देवकीनंदन की माता और पत्नी
देवकीनंदन की माता और पत्नी
देवकीनंदन अपने बेटे के साथ
देवकीनंदन अपने बेटे के साथ

भागवत वाचन की शुरुआत

वर्ष 2001 से, उन्होंने भगवत गीता और राम कथा का प्रचार करना शुरू किया। धर्म के प्रचार के लिए, उन्होंने पूरे देश के साथ-साथ विदेशों में भी यात्रा की है। उन्होंने दुनिया में शांति फैलाने के लिए “विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट” की स्थापना की। जिसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके ऐसे कार्यों की काफी सराहना की गई। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनके धर्मार्थ कार्यों के लिए यूपी रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देवकीनंदन के साथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देवकीनंदन के साथ

विवाद

एक बार ‘प्रवचन सभा’ में, एक लड़की ने हिंदू धर्म में प्रसाद के बारे में देवकीनंदन से कुछ सवाल पूछे और लड़की ने अनजाने से उन्हें ‘यार’ शब्द से संबोधित किया। इस वजह से, वह गुस्सा हो गए और लड़की को दंडित किया। जिससे उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2018 में, उन्होंने एससी/एसटी अधिनियम का विरोध करते हुए एक और विवाद खड़ा किया। जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और समाज की शांति भंग करने के लिए जेल जाना पड़ा।

रोचक तथ्य

उनके माता पिता द्वारा प्यार से ठाकुरजी कहकर पुकारा जाता था, क्योंकि अक्सर वह राम कथाओं और भगवत गीता के पाठ के दौरान राम और कृष्ण की भूमिका का वर्णन करते थे।

 

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