Jesus Christ Biography in hindi | यीशु मसीह जीवन परिचय

यीशु मसीह

यीशु मसीह

जीवन परिचय

  • वास्तविक नाम : यीशु
  • उपनाम : ईसा मसीह, जीसस क्राइस्ट, नासरत का यीशु
  • व्यवसाय : प्रचारक और धार्मिक गुरू

व्यक्तिगत जीवन

  • जन्म तिथि : 4 ई.पू.
  • आयु (मृत्यु के समय) : 33-36 वर्ष
  • जन्मस्थान : बेथलेहेम, जुडिया, रोमन साम्राज्य
  • मृत्यु तिथि : 30-33 ई.पू.
  • मृत्यु स्थल : जेरूसलम, जुडिया, रोमन साम्राज्य (आधुनिक फिलिस्तीन)
  • मृत्यु कारण : क्रूस पर लटकाने पर
  • राष्ट्रीयता : रोमन
  • गृहनगर : जुडिया (वर्तमान में येरूशलेम, इज़राइल)
  • धर्म : यहूदी
  • विवाद : यीशु ने रोमन सम्राटों के अधिकारों की पालना करने से इंकार कर दिया था और स्वयं को ईश्वरपुत्र बताने का भारी पाप किया। जिसके चलते उन्हें रोमन साम्राज्य के गवर्नर पिलातुस के द्वारा मृत्युदंड दिया गया।

परिवार

  • पिता : यूसुफ
  • माता : मरियम
  • भाई : जेम्स, जोसेफ, जुडास, साइमन
  • बहन : नाम ज्ञात नहीं

प्रेम संबंध एवं अन्य जानकारी

  • वैवाहिक स्थिति : अविवाहित
  • पत्नी : कोई नहीं

यीशु मसीह क्रूस पर

यीशु मसीह से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • यीशु ग्रीक शब्द ‘इसुआ’ का अंग्रेजी अनुवाद है, जिसका अर्थ है “जीवन देने वाला”। इस नाम का उल्लेख 900 से अधिक बार बाइबल में किया गया है।
  • यीशु का कोई उपनाम नहीं था। जिसके चलते उनका उपनाम मसीह था। जिसका अर्थ है “अभिषिक्त जन”
  • आधुनिक युग के अनुसार, यीशु का जन्म एक कुंवारी मां “मरियम” के घर हुआ था। उनका जन्म किसी भी जैविक तत्व के बिना एक पवित्र आत्मा के माध्यम से हुआ था। 1)Britannica

    यीशु मसीह अपनी माँ के साथ एक चित्रकारी
    यीशु मसीह अपनी माँ के साथ एक चित्रकारी
  • जॉन ईसाई धर्म गुरु यीशु का सौतेला भाई था। जॉन की माँ एलिजाबेथ और यीशु की मां मरियम चचेरी बहनें थी।
  • कुछ विद्वानों के अनुसार, यीशु का जन्म 25 दिसंबर को नहीं हुआ था। उनका जन्मदिन इस दिन मनाया जाता है क्योंकि इस दिन यहूदियों में एक उमंग का उदय होता है, जिसे हनुकाह का त्यौहार कहा जाता है। जब यीशु का जन्म हुआ तो किसी को पता नहीं चला था कि यीशु का जन्म हो गया है। कुछ विद्वानों का मानना है कि यीशु का जन्म वसंत या गर्मी में हुआ है। मैथ्यू और लूका के अनुसार, यीशु का जन्म बेथलेहेम (वर्तमान में फिलिस्तीन) में हुआ था।
  • यहूदियों के राजा महान रोमन हेरोदेस ने बेथलेहेम के आस-पास के सभी नवजात लड़कों को मारने का आदेश दिया था, जब बुद्धिमान यीशु के जन्म के बारे में उन्हें पता चला। उन्हें डर था कि वह यीशु के जन्म के कारण यहूदियों (यीशु) का राज्य सिंहासन खो सकता है।
  • मैथ्यू के सुसमाचार के अनुसार, यीशु के पिता यूसुफ एक बढ़ई थे और कुछ सालों तक यीशु ने भी इस पेशे को अपनाया था।
  • यीशु मसीह ने 30 वर्ष की उम्र से सेवा करना शुरू कर दिया था।
  • यीशु ने 40 दिनों तक उपवास रखा और 40 महीने तक ईश्वर का प्रचार किया।
  • यीशु मसीह ने सबसे लम्बा उपदेश माउंट की पहाड़ी पर दिया था, जिसका उल्लेख विभिन्न उपन्यासों में किया गया है।

    यीशु मसीह एक चित्रकारी में माउन्ट पहाड़ी पर उपदेश देते हुए
    यीशु मसीह एक चित्रकारी में माउन्ट पहाड़ी पर उपदेश देते हुए
  • उनका पहला चमत्कार कैना में एक विवाह पार्टी में हुआ था। उस पार्टी में यीशु ने शराब को पानी में बदल दिया था।
  • विभिन्न स्रोतों के अनुसार, यीशु ने 37 चमत्कार दिखाए थे।
  • अपनी चमत्कारी शक्तियों के कारण यीशु ने 3 लोगों को मृत्यु से पुनः जीवनदान दिया। यीशु ने नैैन (एक विधवा का पुत्र), जयैर की बेटी और लाजर को शारीरिक पीड़ा राहत दी थी, उनका शारीरिक उपचार करके।
  • यीशु का रूपान्तरण चमत्कारों में से एक था। जो अपने तीन प्रेरितों के साथ महिमा के द्वारा आकाश में लुप्त हो गए।

    यीशु मसीह एक चित्रकारी में
    यीशु मसीह एक चित्रकारी में
  • सूत्रों के मुताबिक, यीशु चार भाषाएँ बोल सकते थे : हिब्रू, ग्रीक, लैटिन और एक अन्य।
  • मैथ्यू और ल्यूक की खोज के अनुसार, यीशु शाकाहारी नहीं थे, वह मछली और भेड़ का बच्चे का भोजन ग्रहण करते थे।
  • उन्होंने सीधे और स्थायी रूप से लोगों को संदेश देने के लिए दृष्टांतों का उपयोग किया।
  • यीशु ने रोमन राजाओं के अधिकारों को खारिज कर दिया। इसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया। उसके बाद उन्हें रोमन प्रीफेक्ट पोंटियस पिलाट को सौंप दिया गया, अंत में उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया।
  • जिस दिन उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था उस दिन को ‘गुड फ्राइडे’ के रूप में मनाया जाता है और यीशु के पुनरुत्थान को रविवार के दिन ‘ईस्टर’ के रूप में मनाया जाता है।
  • क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले, यीशु ने अपने 12 शिष्यों के साथ भोजन किया था और भविष्यवाणी की थी कि उनके एक शिष्य ने उन्हें धोखा दिया है। यीशु की गिरफ्तारी के समय उनके तीन शिष्यों ने उन्हें धोखा दिया था।

    यीशु मसीह अपने शिष्यों से बात करते हुए
    यीशु मसीह अपने शिष्यों से बात करते हुए
  • यीशु पीड़ित होकर मरना नहीं चाहते थे, वह दर्द और पीड़ा का सामना नहीं करना चाहते थे। गिरफ्तार होने से पहले उन्होंने गेटसेमेन के बगीचे में ईश्वर से पूछा, “हे मेरे परमपिता; यदि यह संभव है, तो यह पीड़ा मुझसे गुजरने दो।”
  • यीशु मसीह के जीवन पर इतनी सारी फिल्में बनाई गई हैं। जैसे कि – The Greatest Story Ever Told, Jesus of Nazareth, The Passion of the Christ, Il messia, इत्यादि। “दा विंची कोड” एक और फिल्म है जो यीशु मसीह की जीवनी पर आधारित है, जिसमें टॉम हैंक्स ने अभिनय किया है।

सन्दर्भ    [ + ]

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